A/B टेस्टिंग, जिसे स्प्लिट टेस्टिंग भी कहते हैं, किसी वेबपेज, ईमेल या मार्केटिंग कैंपेन के दो अलग वर्ज़न की तुलना करने का तरीका है, ताकि पता चले कि कौन सा बेहतर काम करता है। इसमें दोनों वर्ज़न (वर्ज़न A और वर्ज़न B) एक जैसे लोगों को बिना किसी क्रम के दिखाए जाते हैं। फिर बिज़नेस क्लिक, कन्वर्ज़न या एंगेजमेंट जैसे आंकड़े मापकर सबसे असरदार वर्ज़न चुनते हैं।
A/B टेस्टिंग से कंपनियां डेटा के आधार पर फ़ैसले ले सकती हैं, यूज़र का अनुभव बेहतर कर सकती हैं और कन्वर्ज़न रेट बढ़ा सकती हैं। बार-बार टेस्ट करने के इस तरीके से अंदाज़े कम होते हैं, मार्केटिंग ज़्यादा असरदार बनती है और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर नतीजे और मुनाफ़ा दोनों बढ़ते हैं।