आज की डिजिटल दुनिया में संवेदनशील डेटा संभालने वाली हर वेबसाइट के लिए सुरक्षा सबसे ज़रूरी है। यहीं SSL (Secure Sockets Layer) की अहम भूमिका आती है। इसे 1995 में Netscape ने बनाया था, ताकि इंटरनेट पर बातचीत में पहचान की पुष्टि, प्राइवेसी और डेटा की सुरक्षा पक्की हो। यह यूज़र के ब्राउज़र और वेबसाइट के बीच के कनेक्शन को एन्क्रिप्ट करके काम करता है, जिससे जानकारी साइबर खतरों से सुरक्षित रहती है।
समय के साथ SSL, TLS में बदल गया, जो आज खूब इस्तेमाल होने वाला आधुनिक एन्क्रिप्शन प्रोटोकॉल है। अगर किसी वेबसाइट पर SSL/TLS चालू है, तो आपको पेज के URL में "HTTP" की जगह "HTTPS" दिखेगा। यह छोटा पर अहम बदलाव बताता है कि साइट यूज़र की जानकारी बचाने के लिए एडवांस सुरक्षा उपाय अपनाती है।