
वेबसाइट एनालिटिक्स क्या है?
वेबसाइट एनालिटिक्स का मतलब है अपनी वेबसाइट का विश्लेषण करना। यह जानना और समझना है कि लोग कहाँ से आते हैं, कैसे पहुँचते हैं, क्या क्लिक करते हैं, कहाँ छोड़ते हैं और कैसे जुड़ते हैं। इससे साफ़ होता है कि आपकी वेबसाइट कैसा परफ़ॉर्म कर रही है और उसे बेहतर बनाने के लिए क्या बदलना है।
यह आपके लिए चार अहम चीज़ें ट्रैक करता है:
वह सोर्स जहाँ से विज़िटर वेबसाइट पर आते हैं।
वेबसाइट पर उनका engagement, जैसे वे किस पेज पर समय बिताते हैं और कैसे जुड़ते हैं
पेज पर उनकी दिक्कतें, जटिलता और दूसरी वजहें जिनसे वे साइट छोड़ देते हैं।
विज़िट के नतीजे, जैसे फ़ॉर्म सबमिशन, सेल और बहुत कुछ।
अपनी वेबसाइट का विश्लेषण करना क्यों ज़रूरी है?
अगर आप चाहते हैं कि आपकी वेबसाइट सिर्फ़ डिजिटल विज़िटिंग कार्ड न रहे, तो आपको देखना होगा कि वह कैसा परफ़ॉर्म कर रही है और उसे कैसे सुधारें। बिना डेटा के फ़ैसले आपका समय, मेहनत और पैसा तक खा सकते हैं। वेबसाइट एनालिटिक्स से आप देख सकते हैं कि क्या काम कर रहा है, क्या बर्बाद हो रहा है और आगे क्या करना है।
आप देखते हैं कि आपके लिए क्या काम करता है
वेबसाइट एनालिटिक्स से आप वे चैनल, पेज और मैसेज पहचान सकते हैं जो साइन-अप, leads या सेल लाते हैं। आप सोर्स देखकर उन्हीं चीज़ों पर फ़ोकस करते हैं जो आपके लिए काम कर रही हैं।
आप वह ठीक करते हैं जो आपके ब्रांड को नुकसान पहुँचाता है
अच्छा विश्लेषण उन दिक्कतों को ढूँढता है जो विज़िटर को काम पूरा करने से रोकती हैं। आप core website vitals, टूटे लिंक, फ़ॉर्म और डिवाइस/ब्राउज़र एरर ढूँढ सकते हैं। इस जानकारी से आप ज़्यादा असर वाले एरर ठीक करके वेबसाइट को सुचारू रख सकते हैं।
आप विज़िटर को समझदारी से ग्राहक बनाते हैं
आप अपनी वेबसाइट को काम पर लगाकर उससे ग्राहक ला सकते हैं। वेबसाइट के विस्तृत विश्लेषण से समझदार फ़ैसले लेकर आप मौजूदा ट्रैफ़िक को बेहतर नतीजों में बदल सकते हैं।
आप अपनी टीम को एक दिशा देते हैं और ROI सुधारते हैं
वेबसाइट एनालिटिक्स डेटा पर टिके फ़ैसले मार्केटिंग, प्रोडक्ट और सेल्स टीम को नतीजों की एक साझा तस्वीर देते हैं। इससे आप ज़्यादा मुनाफ़ा कमा सकते हैं और अच्छा ROI पा सकते हैं।
आपको कौन से वेबसाइट मेट्रिक्स ट्रैक करने चाहिए?
अगर आप अपनी वेबसाइट का विश्लेषण करना चाहते हैं, तो शुरुआत के लिए यह छोटी सी लिस्ट है। ये कुछ मेट्रिक्स हैं जिन्हें आपको ट्रैक करना चाहिए।
पेज विज़िट: पेज विज़िट वेबसाइट के हर पेज पर होने वाली विज़िट की संख्या है। यह reload से फूले बिना उस पेज की असली माँग दिखाती है। इससे देखें कि रुचि बढ़ रही है या घट रही है, और क्या सुधारों से सच में ज़्यादा विज़िटर आए।
Bounce rate: विज़िटर की संख्या के साथ उन लोगों पर भी नज़र रखें जो तुरंत साइट छोड़ देते हैं। इसे bounce rate कहते हैं। Bounce में उछाल आम तौर पर उम्मीद और असलियत के बीच के फ़र्क की ओर इशारा करता है। यह धीमी पेज स्पीड, कमज़ोर headline, बेमतलब कंटेंट, या कभी-कभी विज्ञापन लैंडिंग पेज पर click fraud हो सकता है। इससे आप दिक्कतें समझकर ठीक कर पाएँगे।
पेज पर औसत समय: आपके वेबसाइट पेज पर बिताया गया औसत समय एक और अहम मेट्रिक है। यह बताता है कि पेज अपने काम के लिए ध्यान बाँधे रखता है या नहीं। ज़्यादा हमेशा बेहतर नहीं होता: लंबी गाइड को ध्यान बाँधना चाहिए, लेकिन कीमत या checkout पेज जल्दी होने चाहिए। अगर समय कम है और नतीजे कमज़ोर, तो आपका मुख्य मैसेज या CTA बहुत नीचे हो सकता है, या कंटेंट जल्दी पढ़ने लायक नहीं है। ये मेट्रिक्स दिखाएँगे कि क्या ठीक करना है।
औसत सेशन अवधि: यह औसत समय जैसा ही एक और वेबसाइट मेट्रिक है। यह वह औसत समय है जो एक विज़िटर एक विज़िट में आपकी साइट पर बिताता है। अगर यह घटे, तो हो सकता है लोगों को चीज़ें ढूँढने में दिक्कत हो रही हो।
ट्रैफ़िक सोर्स: यह जानना ज़रूरी है कि आपकी ऑडियंस कहाँ से आ रही है। यह सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म, विज्ञापन या सर्च इंजन से ऑर्गेनिक हो सकता है।
यूज़र टाइप: यूज़र टाइप बताता है कि किस तरह के यूज़र आप तक आ रहे हैं। वे नए यूज़र हो सकते हैं या पुराने। नए यूज़र को साफ़ परिचय और आसान अगले कदम चाहिए। लौटने वाले यूज़र आम तौर पर जल्दी convert होते हैं और उन्हें कम समझाना पड़ता है। आप यूज़र से सही तरह जुड़ने के लिए वेबसाइट में बदलाव कर सकते हैं।
डिवाइस टाइप: देखें कि लोग कैसे और किस डिवाइस से ब्राउज़ करते हैं। यह टैबलेट, मोबाइल या लैपटॉप हो सकता है। इससे आप विश्लेषण कर सकते हैं कि आपकी साइट हर डिवाइस पर कैसा परफ़ॉर्म कर रही है। मोबाइल से आम तौर पर ज़्यादा ट्रैफ़िक आता है, लेकिन वहाँ फ़ॉर्म और धीमे पेज दिक्कत करते हैं। Conversion बढ़ाने के लिए मोबाइल पर स्पीड सुधारें, नेविगेशन आसान करें और फ़ॉर्म फ़ील्ड कम करें।
पेज के हिसाब से ट्रैफ़िक: यह दिखाता है कि कौन से पेज विज़िटर खींचते हैं, वे कहाँ से आते हैं और कहाँ से निकलते हैं। इस डेटा से आप देख सकते हैं कि कोई पेज क्यों काम करता है और कोई क्यों नहीं। ज़्यादा exit rate वाले पेज पर आप उलझे हुए हिस्से ठीक करके उन्हें बेहतर बना सकते हैं।
सेशन ट्रैकिंग: क्या आँकड़े काफ़ी हैं? यह देखना कैसा रहेगा कि यूज़र असल में क्या करते हैं? कुछ वेबसाइट एनालिटिक्स टूल आपके विज़िटर के सेशन रिकॉर्ड करके दिखाते हैं कि वे आपकी साइट पर ठीक-ठीक क्या करते हैं। इससे पूरी साफ़ तस्वीर मिलती है। आप देख पाते हैं कि लोग कहाँ हिचकिचाते हैं, गुस्से में बार-बार क्लिक करते हैं या एरर झेलते हैं, ताकि आप उन्हें जल्दी सुधार सकें।
Conversion rate: यह उन विज़िटर का प्रतिशत है जो वेबसाइट पर मुख्य एक्शन पूरे करते हैं। इसमें फ़ॉर्म सबमिशन, साइन-अप, खरीदारी और बहुत कुछ शामिल है। आप बड़े conversion (सेल) और छोटे conversion (कार्ट में डालना, checkout शुरू करना) दोनों ट्रैक करके ठीक-ठीक देख सकते हैं कि लोग कहाँ छोड़ते हैं। चैनल, डिवाइस और पेज के हिसाब से बाँटकर देखें, ताकि जो काम कर रहा है उसे सुधारें और जो नहीं कर रहा उसे ठीक करें।
Core website vitals: वेबसाइट मेट्रिक्स में ये core website vitals ट्रैक करना शामिल है।
आपका वेबसाइट पेज कितनी जल्दी लोड होता है
साइट गतिविधियों पर कितनी जल्दी जवाब देती है।
दूसरी चीज़ें जो दिखाती हैं कि तेज़ और स्थिर पेज लोगों को जोड़े रखते हैं और SEO में मदद करते हैं।
Keyword परफ़ॉर्मेंस
यह दिखाता है कि आपके पेज किन सर्च queries में दिखते हैं, साथ में impressions, औसत पोज़ीशन और click-through rate भी। सही डेटा से आप कम CTR वाले keywords के लिए टाइटल और meta description सुधार सकते हैं, उन keywords के लिए कंटेंट मज़बूत कर सकते हैं जिनमें आप पहले पेज पर तो हैं पर टॉप पर नहीं, और छूटी हुई queries के लिए नए पेज बना सकते हैं।
WEMASY के एनालिटिक्स और इनसाइट्स टूल से आँकड़ों से आगे जाएँ
WEMASY के एनालिटिक्स और इनसाइट्स टूल से आँकड़ों से आगे जाएँ। इसमें प्राइवेसी-सुरक्षित सेशन रिकॉर्डिंग है जो असली यूज़र जर्नी दिखाती है। ट्रैफ़िक सोर्स, engagement, entry/exit पेज और conversion के नतीजे देखने की यह एक साफ़ जगह है। हमारे स्मार्ट फ़िल्टर और फ़ोकस्ड डैशबोर्ड से डिवाइस, कैंपेन और दूसरी चीज़ों के हिसाब से दिक्कतें पहचानना आसान है। ट्रैकिंग पर गहराई से जानने के लिए पढ़ें हमारा ब्लॉग वेबसाइट परफ़ॉर्मेंस ट्रैक करने के मुख्य मेट्रिक्स। आप हमारी पूरी गाइड भी देख सकते हैं: वेबसाइट एनालिटिक्स क्या है और क्यों ज़रूरी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
छोटे बिज़नेस के लिए सबसे ज़रूरी वेबसाइट एनालिटिक्स मेट्रिक कौन सा है?
Conversion rate। यह बताता है कि कितने प्रतिशत विज़िटर सच में वह एक्शन लेते हैं जो आप चाहते हैं, चाहे फ़ॉर्म भरना हो, खरीदारी हो या साइन अप। अगर ट्रैफ़िक से नतीजे नहीं आते, तो ट्रैफ़िक के आँकड़े बेमानी हैं। पहले conversion ट्रैक करें, फिर पीछे जाकर समझें कि कौन से सोर्स और पेज उन्हें लाते हैं।
मुझे अपना वेबसाइट एनालिटिक्स कितनी बार देखना चाहिए?
ट्रैफ़िक और conversion जैसे मोटे आँकड़े हर हफ़्ते देखें। पेज परफ़ॉर्मेंस, ट्रैफ़िक सोर्स और यूज़र व्यवहार का गहरा विश्लेषण हर महीने करें। अगर आप विज्ञापन चला रहे हैं या नया कंटेंट लॉन्च कर रहे हैं, तो उस दौरान रोज़ देखें। लगातार निगरानी से आप दिक्कतें जल्दी पकड़ते हैं और मौके जल्दी देखते हैं।
सेशन और पेज व्यू में क्या फ़र्क है?
सेशन आपकी वेबसाइट पर एक विज़िट है। यह तब शुरू होता है जब कोई आपकी साइट पर आता है, और कुछ समय (आम तौर पर 30 मिनट) कोई गतिविधि न होने पर खत्म होता है। पेज व्यू हर बार गिना जाता है जब कोई पेज लोड करता है। अगर विज़िटर अपनी विज़िट में कई पेज देखे, तो एक सेशन में कई पेज व्यू हो सकते हैं।
मेरी वेबसाइट पर ट्रैफ़िक तो आ रहा है लेकिन conversion क्यों नहीं?
आम वजहें हैं: आपके विज्ञापन या सर्च लिस्टिंग और पेज पर असल में मिलने वाली चीज़ में फ़र्क, उलझा हुआ पेज layout, धीमा लोड टाइम, अस्पष्ट call to action, या गलत ऑडियंस को टारगेट करना। देखें कि किन पेज पर ट्रैफ़िक ज़्यादा लेकिन conversion rate कम है, और headline, फ़ॉर्म या CTA की जगह बदलकर टेस्ट करें।
क्या मैं बिना टेक्निकल जानकारी के वेबसाइट एनालिटिक्स ट्रैक कर सकता हूँ?
हाँ। WEMASY का एनालिटिक्स और इनसाइट्स टूल डेवलपर के लिए नहीं, बिज़नेस मालिकों के लिए बना है। यह एक साफ़ डैशबोर्ड में ट्रैफ़िक सोर्स, पेज परफ़ॉर्मेंस, यूज़र व्यवहार और conversion दिखाता है। आप सेशन रिकॉर्डिंग देखकर ठीक-ठीक जान सकते हैं कि विज़िटर आपकी साइट से कैसे जुड़ते हैं, बिना कच्चा डेटा पढ़े या कुछ कॉन्फ़िगर किए।
वेबसाइट के लिए अच्छा bounce rate कितना है?
यह पेज के टाइप पर निर्भर करता है। ब्लॉग पोस्ट पर 60% से 70% bounce rate आम है, क्योंकि विज़िटर अक्सर पढ़कर चले जाते हैं। लैंडिंग पेज या प्रोडक्ट पेज को 40% से नीचे रखने का लक्ष्य रखें। अगर हर जगह आपका bounce rate असामान्य रूप से ज़्यादा है, तो यह धीमी लोडिंग, खराब डिज़ाइन या विज़िटर के इरादे से मेल न खाने वाले कंटेंट का संकेत हो सकता है।


