
A/B टेस्टिंग क्या है?
A/B टेस्टिंग को split testing भी कहते हैं। इसमें आप जिस चीज़ को टेस्ट कर रहे हैं, चाहे वेबसाइट हो, ईमेल हो, विज्ञापन हो या कुछ और, उसके दो वर्शन (A और B) की तुलना करते हैं, ताकि पता चले कि आपके लिए कौन बेहतर काम करता है। इस तरीके से आप देख पाते हैं कि छोटे बदलाव यूज़र के व्यवहार और conversion पर क्या असर डालते हैं, और सोच-समझकर फ़ैसले लेते हैं।
A/B टेस्टिंग कैसे काम करती है?
A/B टेस्टिंग में आप टेस्ट होने वाली चीज़ के दो वर्शन बनाते हैं। ये वर्शन स्टेकहोल्डर या ऑडियंस के सामने रखें और देखें कि कौन सा बेहतर परफ़ॉर्म करता है।
A/B टेस्टिंग के कुछ उदाहरण:
ईमेल कैंपेन में दो अलग headline टेस्ट करना, ताकि पता चले कि किससे ज़्यादा open होते हैं।
लैंडिंग पेज के layout के साथ प्रयोग करना, ताकि पता चले कि कौन सा यूज़र को ज़्यादा देर जोड़े रखता है।
दो CTA बटन टेस्ट करना, ताकि पता चले कि किस पर ज़्यादा क्लिक आते हैं।
वेबसाइट के लिए A/B टेस्टिंग क्यों ज़रूरी है?
वेबसाइट मालिकों के लिए अपनी साइट को बेहतर बनाने का यह सबसे असरदार तरीका है। अलग-अलग आइडिया टेस्ट करके और यह देखकर कि किसे सबसे अच्छा रिस्पॉन्स मिलता है, आप ऐसे समझदार फ़ैसले ले सकते हैं जो नतीजे लाएँ। देखते हैं यह आपकी वेबसाइट की कैसे मदद करती है।
असली डेटा पर फ़ैसले लेने में मदद करती है
A/B टेस्टिंग वेबसाइट ऑप्टिमाइज़ेशन से अंदाज़ेबाज़ी हटा देती है। यूज़र क्या चाहते हैं, इस बारे में मान्यताओं या राय पर टिकने के बजाय, A/B टेस्टिंग असली डेटा देती है कि आपकी ऑडियंस अलग-अलग बदलावों पर कैसे रिस्पॉन्ड करती है। चाहे आप नए बटन का रंग टेस्ट करें, headline या layout, नतीजे साफ़ बताते हैं कि कौन सा वर्शन बेहतर है। इससे आप साइट सुधारने के फ़ैसले सोच-समझकर लेते हैं, और हर बदलाव अंदाज़े के बजाय यूज़र के असली व्यवहार पर टिका होता है।
बेहतर यूज़र एक्सपीरियंस बनाने में मदद करती है
विज़िटर को जोड़े रखने और conversion बढ़ाने के लिए अच्छा यूज़र एक्सपीरियंस ज़रूरी है। A/B टेस्टिंग से आप वेबसाइट डिज़ाइन, कंटेंट, call to action और यूज़र जर्नी को बारीकी से सुधार सकते हैं, ताकि यूज़र साइट पर आसानी से घूम सकें। इससे यूज़र ज़्यादा संतुष्ट होते हैं और विज़िटर के वफ़ादार ग्राहक बनने के चांस बढ़ते हैं।
Bounce rate कम करती है
Bounce rate मापता है कि विज़िटर आपकी साइट पर आने के बाद कितनी जल्दी चले जाते हैं। ज़्यादा bounce rate इस बात का संकेत हो सकता है कि विज़िटर को वह नहीं मिल रहा जो वे ढूँढ रहे हैं, या आपकी वेबसाइट दिलचस्प नहीं है। अपने आँकड़ों का मतलब समझने के लिए जानें वेबसाइट परफ़ॉर्मेंस कैसे ट्रैक करें। A/B टेस्टिंग से पता चलता है कि साइट का कौन सा हिस्सा ज़्यादा bounce rate की वजह है, चाहे उलझा हुआ layout हो, धीमे पेज हों या फीका कंटेंट। अलग-अलग वर्शन टेस्ट करके आप वेबसाइट को ऐसा बना सकते हैं कि विज़िटर ज़्यादा देर रुकें, bounce rate घटे और यूज़र साइट देखें और मनचाहा एक्शन लें।
जोखिम कम करती है
बिना टेस्ट किए वेबसाइट में बड़े बदलाव करना जोखिम भरा हो सकता है। कभी-कभी जो थ्योरी में चलता है, वह असल में नहीं चलता, और समय, पैसा और मेहनत बर्बाद होती है। A/B टेस्टिंग से आप बदलावों को पूरी तरह लागू करने से पहले छोटे, कंट्रोल्ड माहौल में टेस्ट कर सकते हैं। अगर कोई बदलाव काम नहीं करता, तो आप उसे बड़े नुकसान के बिना जल्दी छोड़ सकते हैं। इसलिए जोखिम कम करने के लिए A/B टेस्टिंग एक ज़रूरी टूल है। आपकी साइट बड़ी तस्वीर में कैसे फ़िट होती है, यह समझना है तो हमारी गाइड पढ़ें: वेबसाइट क्या है और आपको इसकी ज़रूरत क्यों है।
वेबसाइट के लक्ष्य असरदार तरीके से पाने में मदद करती है
हर वेबसाइट के खास लक्ष्य होते हैं, चाहे साइन-अप बढ़ाना हो, सेल बढ़ाना हो या ज़्यादा engagement लाना हो। A/B टेस्टिंग आपको समझाती है कि इन नतीजों के लिए क्या सबसे अच्छा काम करता है। डेटा के आधार पर लगातार टेस्ट और सुधार करके आप अपने लक्ष्य पा सकते हैं और साइट की कुल परफ़ॉर्मेंस बेहतर कर सकते हैं।
A/B टेस्टिंग वेबसाइट को बेहतर बनाने और अच्छे नतीजे पाने का समझदार तरीका है, और WEMASY इसे आसान और असरदार बनाता है। हमारे टूल आपकी साइट पर होने वाली हर चीज़ ट्रैक करते हैं और सही फ़ैसलों के लिए ज़रूरी इनसाइट्स देते हैं। अगर आप देखना चाहते हैं कि आपकी ऑडियंस के लिए सच में क्या काम करता है, तो WEMASY के साथ अपना पहला A/B टेस्ट चलाकर देखें। साइट सुधारने पर और जानकारी के लिए पढ़ें हमारा शुरुआती लोगों के लिए SEO प्लान।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
A/B टेस्टिंग क्या है और यह कैसे काम करती है?
A/B टेस्टिंग में आप अपनी वेबसाइट पर किसी चीज़ के दो वर्शन बनाते हैं और हर वर्शन विज़िटर के अलग ग्रुप को दिखाते हैं। फिर नतीजों की तुलना करते हैं कि कौन सा बेहतर रहा। जिस वर्शन पर ज़्यादा engagement, क्लिक या conversion आते हैं, वह जीतता है, और आप उसे हमेशा के लिए लागू कर देते हैं।
वेबसाइट पर पहले किन चीज़ों का A/B टेस्ट करना चाहिए?
Headline, call-to-action बटन और फ़ॉर्म layout जैसी ज़्यादा असर वाली चीज़ों से शुरू करें। इन्हीं जगहों पर छोटे बदलाव conversion rate में सबसे बड़ा फ़र्क लाते हैं। इन्हें टेस्ट करने के बाद पेज layout, इमेज, कीमत दिखाने का तरीका और नेविगेशन मेन्यू पर जाएँ।
A/B टेस्ट कितने समय तक चलाना चाहिए?
टेस्ट इतना लंबा चलाएँ कि भरोसेमंद (statistically significant) डेटा मिल जाए। ज़्यादातर वेबसाइट के लिए इसका मतलब कम से कम एक से दो हफ़्ते है। अगर आपकी साइट पर ट्रैफ़िक कम है, तो तीन से चार हफ़्ते चलाना पड़ सकता है। टेस्ट जल्दी बंद करने से सैंपल छोटा रहता है और नतीजे गलत आ सकते हैं।
क्या मैं बिना टेक्निकल जानकारी के A/B टेस्ट चला सकता हूँ?
हाँ। आज के A/B टेस्टिंग टूल टेक्निकल काम खुद संभालते हैं। WEMASY के साथ आप अपने डैशबोर्ड से ही टेस्ट सेट कर सकते हैं। प्लेटफ़ॉर्म ट्रैफ़िक को दोनों वर्शन में अपने आप बाँटता है, यूज़र का व्यवहार ट्रैक करता है और साफ़ रिपोर्ट में दिखाता है कि कौन सा वर्शन बेहतर है।
A/B टेस्टिंग और multivariate टेस्टिंग में क्या फ़र्क है?
A/B टेस्टिंग किसी एक चीज़ के दो वर्शन की तुलना करती है, जैसे headline या बटन का रंग। Multivariate टेस्टिंग एक साथ कई चीज़ें बदलती है और मापती है कि अलग-अलग कॉम्बिनेशन कैसे परफ़ॉर्म करते हैं। A/B टेस्टिंग आसान है और कम ट्रैफ़िक में चल जाती है। Multivariate टेस्टिंग गहरी इनसाइट्स देती है, लेकिन भरोसेमंद नतीजों के लिए ज़्यादा विज़िटर चाहिए।
WEMASY A/B टेस्टिंग में कैसे मदद करता है?
WEMASY के बिल्ट-इन एनालिटिक्स और टेस्टिंग टूल से आप टेस्ट वर्शन बना सकते हैं, ट्रैफ़िक बाँट सकते हैं और एक डैशबोर्ड से नतीजे ट्रैक कर सकते हैं। आप बिना कोड लिखे पेज, फ़ॉर्म और कंटेंट के वर्शन टेस्ट कर सकते हैं। प्लेटफ़ॉर्म रियल-टाइम डेटा दिखाता है कि कौन सा वर्शन ज़्यादा engagement लाता है, ताकि आप सबूत के आधार पर भरोसे से फ़ैसले लें।


