एक प्रतिस्पर्धी हर स्क्रीन पर निखरा हुआ दिखता है। दूसरा तंग और पुराना सा लगता है, जबकि दोनों मिलती-जुलती सर्विस बेचते हैं। इस फ़र्क की वजह अक्सर कलर साइकोलॉजी और उसके पीछे की आदतें होती हैं। आप फ़र्क तुरंत महसूस कर लेते हैं, भले ही अभी हर नियम का नाम न बता पाएँ।
कलर साइकोलॉजी में यह पढ़ा जाता है कि रंग मूड, याद और कदम उठाने पर कैसे असर डालते हैं। इस चैप्टर में आसान भाषा में समझाया गया है कि इसका मतलब क्या है, यह आपकी वेबसाइट और मार्केटिंग पर क्यों असर डालती है, और इसे बिना भारी शब्दों में उलझे कैसे इस्तेमाल करें। आप यह भी देखेंगे कि कलर साइकोलॉजी मार्केटिंग इसी तस्वीर में कैसे फ़िट होती है। चलिए, एक-एक कदम करके समझते हैं।
कलर साइकोलॉजी क्या है
कलर साइकोलॉजी में यह पढ़ा जाता है कि रंग मूड, याद और कदम उठाने पर कैसे असर डालते हैं।
असल में आपकी वेबसाइट के हेडर, सर्विस पेज, सोशल ग्राफ़िक्स और प्रिंट मटीरियल में कलर साइकोलॉजी से जुड़ी बातें दिखती हैं। जब आप इसे सही नाम से जानते हैं, तो डिज़ाइनर को जल्दी ब्रीफ़ दे पाते हैं और ड्राफ़्ट भरोसे के साथ जाँच पाते हैं।
कलर साइकोलॉजी मार्केटिंग जैसे जुड़े हुए विषय सीधे इससे संबंधित हैं। इस मॉड्यूल का बाकी हिस्सा पढ़ते समय इन्हें ध्यान में रखें।
मार्केटिंग के रंग विज्ञापनों, पैकेजिंग और वेबसाइट पर बार-बार दिखते हैं, इसलिए समय के साथ उनसे जुड़ाव बनता जाता है।
कलर साइकोलॉजी आपके बिज़नेस के लिए क्यों ज़रूरी है?
ग्राहक हर शब्द पढ़ने से पहले ही लेआउट देखकर भरोसे का अंदाज़ा लगा लेते हैं। साफ़ विज़ुअल ढाँचा उलझन घटाता है और आपके ऑफ़र को समझना आसान बनाता है।
पश्चिमी संदर्भ में लाल रंग अक्सर जल्दबाज़ी या ऊर्जा का संकेत देता है।
तीन ऐसी भावनाएँ लिखें जो आप चाहते हैं कि ग्राहक महसूस करें, फिर उन्हें सहारा देने वाले रंग चुनें।
अगर आप देखना चाहते हैं कि यह आस-पास के विषयों से कैसे जुड़ता है, तो आगे मार्केटिंग में कलर साइकोलॉजी और ब्रांडिंग में कलर साइकोलॉजी पढ़ें।
आज ही काम आने वाली प्रैक्टिकल चेकलिस्ट
तीन ऐसी भावनाएँ लिखें जो आप चाहते हैं कि ग्राहक महसूस करें, फिर उन्हें सहारा देने वाले रंग चुनें।
कोई भी पेज जाँचते समय देखें कि कलर साइकोलॉजी से जुड़ी बात मोबाइल पर पहली स्क्रॉल में ही दिख रही है या नहीं। अगर नहीं, तो बारीकियाँ सँवारने से पहले सेक्शन का क्रम बदलें।
बदलाव से पहले और बाद के स्क्रीनशॉट सेव करें, ताकि आपको पता चले कि आपकी साइट पर कलर साइकोलॉजी के मामले में क्या सचमुच काम आया।
यह चेकलिस्ट उन सभी को दें जो आपकी साइट अपडेट करते हैं, ताकि नए पेजों पर भी कलर साइकोलॉजी मार्केटिंग को लेकर एकरूपता बनी रहे।
इस महीने कोई एक मेट्रिक देखने के लिए चुनें, जैसे पेज पर बिताया समय या फ़ॉर्म शुरू करने वाले लोग, ताकि डिज़ाइन के बदलाव सिर्फ़ पसंद पर नहीं, बिज़नेस के नतीजों से जुड़े रहें।
यह विषय आपके पूरे ब्रांड से कैसे जुड़ता है
विज़ुअल फ़ैसले शायद ही कभी एक ही पेज तक सीमित रहते हैं। पश्चिमी संदर्भ में लाल रंग अक्सर जल्दबाज़ी या ऊर्जा का संकेत देता है।
आपकी सोशल पोस्ट, ईमेल और प्रिंट की चीज़ें वही हायरार्की, रंग और टाइप के नियम दोहराएँ जो आप वेब पर इस्तेमाल करते हैं।
जब ब्रांड के विज़ुअल इधर-उधर हो जाते हैं, तो ग्राहक को हल्का सा बेमेल महसूस होता है, भले ही वह उसे समझा न पाए।
इस मॉड्यूल के जुड़े हुए चैप्टर से तुलना करने के लिए नीले रंग की साइकोलॉजी देखें।
मार्केटिंग के रंग विज्ञापनों, पैकेजिंग और वेबसाइट पर बार-बार दिखते हैं, इसलिए समय के साथ उनसे जुड़ाव बनता जाता है।
वे सवाल जो लोग अक्सर छोड़ देते हैं
कलर साइकोलॉजी मार्केटिंग और लाल रंग की साइकोलॉजी जैसे दूसरे शब्द आपको गहरे उदाहरण खोजने और अपने काम की आम मानकों से तुलना करने में मदद करते हैं।
पश्चिमी संदर्भ में लाल रंग अक्सर जल्दबाज़ी या ऊर्जा का संकेत देता है।
एक ऐसा बदलाव लिख लें जिसे आप इस हफ़्ते लाइव पेज पर पहले और बाद के रूप में टेस्ट करेंगे। नापे-तोले छोटे बदलाव धुँधली योजनाओं से बेहतर होते हैं।
अपनी टीम को कलर साइकोलॉजी के आसपास की साझा शब्दावली सिखाने से डिज़ाइनर और एजेंसी के साथ बदलावों के दौर कम हो जाते हैं।
वे टूल जो विज़ुअल अपडेट आसान बनाते हैं
लेआउट और स्टाइलिंग की कई दिक्कतें सुधारने के लिए आपको कस्टम कोड की ज़रूरत नहीं होती। विज़ुअल एडिटर से आप स्पेसिंग, रंग और टाइपोग्राफ़ी बदल सकते हैं और साथ ही मोबाइल व डेस्कटॉप व्यू देख सकते हैं।
WEMASY में विज़ुअल एडिटिंग वाला वेबसाइट बिल्डर है, ताकि आप हर छोटे बदलाव के लिए डेवलपर का इंतज़ार किए बिना बदलाव पब्लिश कर सकें। जो सीखा है उसे लागू करने के लिए तैयार हों, तो वेबसाइट बिल्डर खोलें।
अपडेट पब्लिश करने के बाद मार्केटिंग में कलर साइकोलॉजी और ब्रांडिंग में कलर साइकोलॉजी फिर देखें, ताकि पूरा मॉड्यूल आपके दिमाग में जुड़ा रहे।
अब आपके पास कलर साइकोलॉजी को देखने का एक काम का नज़रिया है। इसे तब इस्तेमाल करें जब आप अपनी साइट जाँचें, मार्केटिंग एसेट मंज़ूर करें या डिज़ाइनर को ब्रीफ़ दें। इस मॉड्यूल में आगे बढ़ते रहने के लिए ब्रांडिंग में कलर साइकोलॉजी और नीले रंग की साइकोलॉजी पढ़ें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
कलर साइकोलॉजी सुधारने में कितना समय लगता है?
ज़्यादातर छोटे बिज़नेस इस चैप्टर की बुनियादी बातें लागू करने के बाद कुछ ही फ़ोकस्ड सेशन में पेज साफ़ होते देखते हैं। अपने होमपेज से शुरू करें, फिर वही नियम सर्विस और कॉन्टैक्ट पेज पर लागू करें।
क्या कलर साइकोलॉजी पर काम करने के लिए डिज़ाइनर चाहिए?
जटिल रीब्रांडिंग में डिज़ाइनर मदद करता है, लेकिन कलर साइकोलॉजी से जुड़े कई सुधार आप खुद कर सकते हैं, बस यह पता होना चाहिए कि क्या देखना है। इससे जुड़ी जानकारी के लिए इस चैप्टर के साथ मार्केटिंग में कलर साइकोलॉजी भी पढ़ें।
क्या WEMASY आपकी वेबसाइट पर कलर साइकोलॉजी लागू करने में मदद कर सकता है?
WEMASY के वेबसाइट बिल्डर में विज़ुअल एडिटर है, जिससे आप बिना कोड के लेआउट, रंग और टाइपोग्राफ़ी बदल सकते हैं। टेम्पलेट अपडेट करने और मोबाइल पर बदलाव देखने के लिए वेबसाइट बिल्डर खोलें।
कलर साइकोलॉजी में सबसे आम गलती क्या होती है?
लोग एक बार में सब कुछ ठीक करने की कोशिश करते हैं, बजाय एक समय में एक पेज के। कोई एक प्राथमिकता चुनें, जैसे पढ़ने में आसानी या कॉन्ट्रास्ट, फिर अगले सुधार के लिए ब्रांडिंग में कलर साइकोलॉजी देखें।
कलर साइकोलॉजी का SEO से क्या संबंध है?
साफ़ विज़ुअल हायरार्की और पढ़ने लायक टाइप विज़िटर को पेज पर ज़्यादा देर रोकते हैं, जिससे वे एंगेजमेंट सिग्नल मज़बूत होते हैं जिन पर सर्च इंजन नज़र रखते हैं। सबसे अच्छे नतीजों के लिए डिज़ाइन के सुधार के साथ कंटेंट का मज़बूत ढाँचा भी रखें।
कलर साइकोलॉजी के बाद आगे क्या सीखना चाहिए?
ऑनलाइन अपने ब्रांड के लिए पूरा विज़ुअल सिस्टम बनाने के लिए इस किताब में मार्केटिंग में कलर साइकोलॉजी और ब्रांडिंग में कलर साइकोलॉजी पढ़ें।