कंटेंट मार्केटिंग प्लान कैसे बनाएँ

कंटेंट मार्केटिंग प्लान सिर्फ़ टॉपिक की लिस्ट से आगे जाकर बनाने, डिस्ट्रीब्यूशन और मापन को एक साथ जोड़ता है। इस चैप्टर में बताया गया है कि ऐसा प्लान कैसे बनाएँ जिसमें हर आर्टिकल और पेज किसी बिज़नेस नतीजे से जुड़ा हो।

ड्राफ़्ट

कुछ बिज़नेस नियमित पब्लिश करने के बाद भी बराबर नतीजे क्यों देखते हैं? उनके पास कंटेंट प्लान होता है, पर कंटेंट मार्केटिंग प्लान नहीं। फ़र्क़ है डिस्ट्रीब्यूशन, मापन और कमाई के लक्ष्य से तालमेल का। इनके बिना पब्लिशिंग काम जैसी लगती है, जबकि बिज़नेस पर असर नज़र नहीं आता।

कंटेंट मार्केटिंग प्लान एक डॉक्यूमेंट है जो आपके कंटेंट बनाने के शेड्यूल को डिस्ट्रीब्यूशन चैनल, ऑडियंस टारगेट और नापे जा सकने वाले नतीजों से जोड़ता है। यह सिर्फ़ यह नहीं बताता कि आप क्या पब्लिश करेंगे, यह भी बताता है कि हर पीस पाठकों तक कैसे पहुँचेगा और सफलता कैसी दिखती है।

कंटेंट मार्केटिंग प्लान में क्या होता है

पूरे कंटेंट मार्केटिंग प्लान में छह हिस्से होते हैं। लक्ष्य और KPI: कंटेंट को संख्या में क्या हासिल करना चाहिए। ऑडियंस सेगमेंट: हर स्टेज पर आप किन तक पहुँचना चाहते हैं। कंटेंट टाइप और टॉपिक: आप कौन-से फ़ॉर्मैट बनाएँगे। डिस्ट्रीब्यूशन चैनल: हर पीस का प्रचार कहाँ और कैसे होगा। प्रोडक्शन शेड्यूल: कौन क्या बनाएगा और कब। मापन प्लान: आप परफ़ॉर्मेंस कैसे ट्रैक करेंगे और बदलाव कैसे करेंगे।

यह कंटेंट प्लान से बड़ा है, जो सिर्फ़ बनाने वाली लिस्ट पर फ़ोकस करता है। मार्केटिंग प्लान बनाने के काम को इस संदर्भ में रखता है कि कंटेंट आपके पूरे मार्केटिंग लक्ष्य के काम कैसे आता है।

पहला स्टेप: नापे जा सकने वाले लक्ष्य तय करें

टॉपिक से नहीं, नतीजों से शुरू करें। कंटेंट मार्केटिंग के आम लक्ष्य हैं: ऑर्गेनिक ट्रैफ़िक बढ़ाना, ईमेल सब्सक्राइबर जुटाना, योग्य लीड लाना और सेल्फ़-सर्विस आर्टिकल से सपोर्ट टिकट घटाना। हर लक्ष्य के साथ संख्या और डेडलाइन जोड़ें।

ऐसे KPI चुनें जिन्हें आप अपने मौजूदा टूल से ट्रैक कर सकें। ज़्यादातर वेबसाइट मालिकों के लिए ट्रैफ़िक, कन्वर्ज़न रेट, पेज पर बिताया समय और फ़ॉर्म सबमिशन आसानी से मिल जाते हैं। ऐसे KPI से बचें जिनके लिए ऐसा डेटा चाहिए जो आप अभी जुटा नहीं सकते।

दूसरा स्टेप: ऑडियंस सेगमेंट तय करें

आपकी कंटेंट स्ट्रैटेजी में आपकी मुख्य ऑडियंस पहले से लिखी है। मार्केटिंग प्लान उस ऑडियंस को ख़रीदारी के सफ़र में उनकी जगह के हिसाब से सेगमेंट में बाँटता है। पहली बार आए विज़िटर को उस मौजूदा ग्राहक से अलग कंटेंट चाहिए जो अपग्रेड सोच रहा है।

हर सेगमेंट के लिए कम से कम एक कंटेंट टाइप तय करें। जागरूकता वाला कंटेंट नए विज़िटर को खींचता है। विचार वाला कंटेंट विकल्पों की तुलना करता है। फ़ैसले वाला कंटेंट साइनअप या ख़रीदारी करवाता है। रिटेंशन वाला कंटेंट मौजूदा ग्राहकों को जोड़े रखता है।

तीसरा स्टेप: हर पीस के लिए डिस्ट्रीब्यूशन प्लान करें

बनाना और बाँटना अलग-अलग करना आम चूक है। हर प्लान किए पीस के लिए लिखें कि वह पाठकों तक कैसे पहुँचेगा। अपने चैनल में आपकी वेबसाइट, ईमेल लिस्ट और साइट पर नोटिफ़िकेशन आते हैं। कमाए हुए चैनल में शेयर, ज़िक्र और बैकलिंक आते हैं। पेड चैनल में वे विज्ञापन आते हैं जो ख़ास आर्टिकल या लैंडिंग पेज का प्रचार करते हैं।

हर पीस को हर चैनल की ज़रूरत नहीं होती। कॉर्नरस्टोन गाइड को ईमेल में फ़ीचर, सोशल पोस्ट और जुड़े आर्टिकल से इंटरनल लिंक मिल सकते हैं। एक छोटी FAQ पोस्ट के लिए आपके हेल्प पेज पर जगह और एक सोशल ज़िक्र काफ़ी हो सकता है।

चौथा स्टेप: प्रोडक्शन शेड्यूल बनाएँ

अपनी टॉपिक लिस्ट वाजिब डेडलाइन के साथ कंटेंट कैलेंडर में ले जाएँ। ब्रीफ़ लिखने, ड्राफ़्ट, एडिटिंग, डिज़ाइन, पब्लिश और प्रमोशन का समय जोड़ें। जिस पीस को लिखने में पाँच दिन लगें, उसके रिव्यू के लिए दो दिन और डिस्ट्रीब्यूशन सेटअप के लिए एक दिन और चाहिए हो सकता है।

जहाँ हो सके, बनाने और प्रमोशन के ज़िम्मेदार अलग रखें। राइटर ड्राफ़्ट पूरा करे। मार्केटिंग लीड ईमेल और सोशल पोस्ट शेड्यूल करे। साफ़ हैंडऑफ़ से ऐसा पब्लिश किया कंटेंट नहीं बचता जिसका कोई प्रचार न करे।

पाँचवाँ स्टेप: मापन की रफ़्तार तय करें

साप्ताहिक और मासिक रिव्यू शेड्यूल करें। साप्ताहिक जाँच में पब्लिशिंग की रफ़्तार और शुरुआती एंगेजमेंट के संकेत देखे जाते हैं। मासिक रिव्यू नतीजों की तुलना आपके KPI से करते हैं और अगले प्लानिंग साइकिल को दिशा देते हैं। लिखकर रखें कि क्या चला और क्या कमज़ोर रहा, ताकि टीम अंदाज़ों से नहीं, पैटर्न से सीखे।

मापन चक्र को पूरा करता है। जब कोई टॉपिक फ़ॉर्मैट बार-बार कन्वर्ज़न लाए, तो उसे और प्लान करें। जब कोई चैनल ऐसा ट्रैफ़िक भेजे जो तुरंत लौट जाए, तो वहाँ और प्रमोशन में पैसा लगाने से पहले लैंडिंग अनुभव की जाँच करें।

अगर सर्च में दिखना आपके लक्ष्यों का हिस्सा है, तो आपका मार्केटिंग प्लान SEO रोडमैप से जुड़ा होना चाहिए। हमारी शुरुआत करने वालों के लिए SEO प्लान गाइड में सर्च के बुनियादी स्टेप हैं जो आपके कंटेंट मार्केटिंग प्लान के साथ काम करते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

कंटेंट मार्केटिंग प्लान और कंटेंट स्ट्रैटेजी में क्या फ़र्क़ है?

स्ट्रैटेजी टॉपिक, ऑडियंस और ब्रांड के लहजे का आपका लंबे समय का ढाँचा है। मार्केटिंग प्लान वह कामकाजी डॉक्यूमेंट है जो किसी ख़ास अवधि के लिए बनाने, डिस्ट्रीब्यूशन और मापन को कोऑर्डिनेट करता है। स्ट्रैटेजी "क्यों" है, मार्केटिंग प्लान अगली तिमाही का "कैसे" है।

कंटेंट मार्केटिंग प्लान कितना लंबा होना चाहिए?

ज़्यादातर छोटे बिज़नेस के लिए दो से चार पन्ने काफ़ी हैं। उसमें अपने लक्ष्य, ऑडियंस सेगमेंट, टॉपिक लिस्ट, डिस्ट्रीब्यूशन नोट और मापन प्लान रखें। लंबाई से ज़्यादा ज़रूरी है साफ़गोई और यह कि आपकी टीम उसे हर हफ़्ते सच में देखती है या नहीं।

क्या शुरू करने के लिए मार्केटिंग प्लान टेम्पलेट चाहिए?

टेम्पलेट सोच को ढाँचा देता है, पर आपका प्लान आपके असली लक्ष्य और क्षमता को दिखाना चाहिए। लक्ष्य और KPI बदले बिना कोई आम मार्केटिंग प्लान टेम्पलेट कॉपी करने से ऐसा डॉक्यूमेंट बनता है जिसे कोई इस्तेमाल नहीं करता।

कंटेंट मार्केटिंग प्लान को कितनी बार अपडेट करना चाहिए?

हर महीने रिव्यू करें और हर तिमाही बदलाव करें। मासिक रिव्यू में डेडलाइन और डिस्ट्रीब्यूशन के तरीक़े ठीक किए जाते हैं। तिमाही बदलाव में परफ़ॉर्मेंस डेटा के आधार पर लक्ष्य, ऑडियंस की प्राथमिकताएँ और टॉपिक पिलर अपडेट होते हैं।

कंटेंट मार्केटिंग प्लान में कितना बजट रखें?

बनाने की लागत, डिज़ाइन, प्रमोशन और टूल का हिसाब रखें। सीमित प्लान में भी यह लिखना काम आता है कि आप अंदरूनी समय, फ़्रीलांसर या पेड डिस्ट्रीब्यूशन पर निर्भर हैं। कंटेंट मार्केटिंग में छिपी लागत आमतौर पर समय होती है, सॉफ़्टवेयर नहीं।

आपके मार्केटिंग प्लान का पब्लिश किया कंटेंट कहाँ रहता है?

आपकी वेबसाइट प्लान के हर पीस का हब है। WEMASY का वेबसाइट बिल्डर पब्लिशिंग संभालता है और उसमें एनालिटिक्स भी है, ताकि आप अपने मार्केटिंग प्लान में तय KPI ट्रैक कर सकें।

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