पिछले महीने आपने चार ब्लॉग पोस्ट पब्लिश किए। दो आपके प्रोडक्ट के बारे में थे। एक सीज़न की टिप थी। एक ऐसा टॉपिक था जो आपने किसी प्रतिद्वंद्वी को कवर करते देखा था। ट्रैफ़िक थोड़ा बढ़ा, फिर रुक गया। टीम में कोई नहीं बता पाया कि ये चार टॉपिक क्यों चुने गए और अगले चार क्या होने चाहिए।
कंटेंट स्ट्रैटेजी के बिना यही होता है। कंटेंट स्ट्रैटेजी आपका लिखित प्लान है: आप क्या पब्लिश करेंगे, वह किसके लिए है और हर पीस से क्या हासिल होना चाहिए। यह रोज़ के लिखने के फ़ैसलों को बिज़नेस लक्ष्य से जोड़ती है, ताकि आप अंदाज़े लगाना छोड़कर ऐसा कुछ बनाएँ जो समय के साथ बढ़ता जाए।
कंटेंट स्ट्रैटेजी में क्या-क्या होता है
कंटेंट स्ट्रैटेजी पाँच सवालों के जवाब देती है। आपकी ऑडियंस कौन है और उसे आपसे क्या चाहिए? आप किन टॉपिक पर अपनी पकड़ बनाएँगे? कौन-से फ़ॉर्मैट इस्तेमाल करेंगे? हर पीस किस लक्ष्य को पूरा करता है? सफलता को कैसे मापेंगे? इसके लिए पचास पन्नों का डॉक्यूमेंट नहीं चाहिए। ज़्यादातर छोटे बिज़नेस के लिए एक पन्ने की साफ़ समरी और कुछ सपोर्टिंग नोट काफ़ी हैं।
आपकी वेबसाइट कंटेंट स्ट्रैटेजी में उन पेज और आर्टिकल के नाम होने चाहिए जो सबसे ज़रूरी हैं। सर्विस पेज, कॉर्नरस्टोन गाइड और रेगुलर ब्लॉग पोस्ट, तीनों का रोल अलग होता है। इन्हें साफ़ लिख देने से आपकी साइट इधर-उधर नहीं बढ़ती।
अगर आप पहले बुनियादी बात समझना चाहते हैं, तो पिछले मॉड्यूल में कंटेंट स्ट्रैटेजी क्या है पढ़ें। यह चैप्टर प्लान बनाने पर है।
पहला स्टेप: ऑडियंस और लक्ष्य तय करें
उस इंसान से शुरू करें जिस तक आप पहुँचना चाहते हैं। लिखें कि वह क्या काम करता है, उसकी मुख्य परेशानी क्या है और ख़रीदने से पहले वह क्या सर्च करता है। फिर दो-तीन बिज़नेस लक्ष्य चुनें जिन्हें कंटेंट सपोर्ट करे। आम लक्ष्य हैं: लीड लाना, भरोसा बनाना, सपोर्ट के सवाल घटाना और सर्च में दिखना बेहतर करना।
लक्ष्य के साथ संख्या जुड़नी चाहिए। "ज़्यादा ट्रैफ़िक चाहिए" अस्पष्ट है। "छह महीने में सर्विस पेज पर ऑर्गेनिक विज़िट तीस प्रतिशत बढ़ाना" ऐसा लक्ष्य है जिसे आप जाँच सकते हैं। हर लक्ष्य को ऐसे मेट्रिक से जोड़ें जिसे आप अपनी वेबसाइट एनालिटिक्स से ट्रैक कर सकें।
दूसरा स्टेप: जो पहले से है उसकी जाँच करें
नया कंटेंट प्लान करने से पहले अपनी साइट के हर पेज और पोस्ट की लिस्ट बनाएँ। देखें कि किन पीस पर ट्रैफ़िक आता है, कौन-से सर्च में रैंक करते हैं और कौन-से पुराने लगते हैं। हर एक पर निशान लगाएँ: रखना है, अपडेट करना है या हटाना है। यह ऑडिट वे कमियाँ दिखाता है जो सिर्फ़ आगे देखने से नज़र नहीं आतीं।
तीसरा स्टेप: अपने टॉपिक पिलर चुनें
टॉपिक पिलर तीन से पाँच ऐसे विषय हैं जिनके लिए आपका ब्रांड जाना जाएगा। एक लैंडस्केपिंग कंपनी लॉन की बुनियादी देखभाल, मौसम के हिसाब से रखरखाव और गार्डन डिज़ाइन चुन सकती है। एक सॉफ़्टवेयर कंपनी ऑनबोर्डिंग गाइड, फ़ीचर की तुलना और इंडस्ट्री के ट्रेंड चुन सकती है।
हर पिलर आपकी ऑडियंस की ज़रूरत और बिज़नेस लक्ष्य से जुड़ा होना चाहिए। अगर कोई टॉपिक आपको पसंद है पर आपके ग्राहक उसके बारे में कभी नहीं पूछते, तो वह शौक की पोस्ट है, स्ट्रैटेजी का हिस्सा नहीं। हर पिलर में इतनी गहराई होनी चाहिए कि महीनों तक कई आर्टिकल बन सकें, सिर्फ़ एक पोस्ट नहीं।
चौथा स्टेप: कंटेंट को ख़रीदार के सफ़र से जोड़ें
हर विज़िटर ख़रीदने के लिए तैयार नहीं होता। आपकी कंटेंट स्ट्रैटेजी में जागरूकता, विचार और फ़ैसले, तीनों स्टेज होने चाहिए। जानकारी देने वाले आर्टिकल नए पाठकों को खींचते हैं। तुलना वाली गाइड और केस स्टडी उन्हें ख़रीदारी के क़रीब ले जाती हैं। पहले मदद करें, और बेचें तब जब पाठक के पास फ़ैसले के लिए काफ़ी जानकारी हो।
पाँचवाँ स्टेप: पब्लिश करने की रफ़्तार तय करें
यह तय करें कि आप कितनी बार अच्छा काम पब्लिश कर सकते हैं, यह नहीं कि आप कितनी बार चाहते हैं। महीने में एक मज़बूत पीस, चार जल्दबाज़ी वाली पोस्ट से बेहतर है जिन्हें कोई पूरा नहीं पढ़ता। तारीखें कंटेंट कैलेंडर में डालें, ताकि हर टॉपिक की डेडलाइन और ज़िम्मेदार इंसान तय हो।
बनाने, रिव्यू और पब्लिश करने का समय जोड़कर चलें। ऐसी रफ़्तार चुनें जो आप कम से कम छह महीने निभा सकें।
छठा स्टेप: डॉक्यूमेंट बनाएँ और हर तिमाही रिव्यू करें
स्ट्रैटेजी को एक शेयर्ड डॉक्यूमेंट में लिखें जिसे आपकी टीम देख सके। उसमें ऑडियंस प्रोफ़ाइल, पिलर टॉपिक, लक्ष्य, पब्लिशिंग की रफ़्तार और लिखने के लहजे की गाइडलाइन रखें। जब कोई पूछे "क्या हमें इस पर लिखना चाहिए?" तो स्ट्रैटेजी साफ़ वजह के साथ हाँ या ना में जवाब दे देती है।
प्लान को हर तिमाही रिव्यू करें। सर्च के ट्रेंड बदलते हैं, प्रोडक्ट बदलते हैं और प्रतिद्वंद्वी नए एंगल से लिखते हैं। जीती-जागती स्ट्रैटेजी अपने मूल फ़ोकस को खोए बिना ख़ुद को ढाल लेती है। अपने कंटेंट प्लान से स्ट्रैटेजी को अगले नब्बे दिन के ठोस पीस में बदलें।
जब आपकी स्ट्रैटेजी तैयार हो जाए, तो अगले चैप्टर कैलेंडर, ब्रीफ़, वर्कफ़्लो और गैप एनालिसिस पर हैं। पब्लिश किए कंटेंट को ट्रैफ़िक में बदलने के लिए कंटेंट से वेबसाइट ट्रैफ़िक कैसे बढ़ाएँ पढ़ें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
कंटेंट स्ट्रैटेजी बनाने में कितना समय लगता है?
छोटे बिज़नेस के लिए पहला साफ़ ड्राफ़्ट एक से दो कामकाजी दिन में बन जाता है। ऑडिट, ऑडियंस की रिसर्च और लक्ष्य तय करने के लिए समय चाहिए। पहली तिमाही में जैसे-जैसे आप पब्लिश करते हैं और सीखते हैं कि क्या चलता है, स्ट्रैटेजी निखरती जाती है।
क्या छोटे बिज़नेस को औपचारिक कंटेंट स्ट्रैटेजी चाहिए?
जो भी बिज़नेस ऑनलाइन पब्लिश करता है, उसे लिखित प्लान से फ़ायदा होता है, चाहे वह छोटा ही क्यों न हो। इसके बिना आप ट्रेंड के पीछे भागते हैं, और अपने ग्राहकों के काम के टॉपिक पर अथॉरिटी नहीं बना पाते। हर साइज़ की कंपनी के लिए एक पन्ने की स्ट्रैटेजी, बिना स्ट्रैटेजी से बेहतर है।
कंटेंट स्ट्रैटेजी और कंटेंट प्लान में क्या फ़र्क़ है?
स्ट्रैटेजी लंबे समय का ढाँचा है: ऑडियंस, पिलर, लक्ष्य और लहजा। प्लान अगले महीने या तिमाही में बनने वाले ख़ास पीस की ठोस लिस्ट है। स्ट्रैटेजी दिशा तय करती है, प्लान उसे पूरा करता है।
कंटेंट स्ट्रैटेजी में कितने टॉपिक पिलर होने चाहिए?
ज़्यादातर ब्रांड के लिए तीन से पाँच पिलर ठीक रहते हैं। कम हों तो सर्च में आपकी पहुँच सीमित रहती है। ज़्यादा हों तो मेहनत इतनी बँट जाती है कि गहराई नहीं बन पाती। हर पिलर पर साल भर में कम से कम चार से छह आर्टिकल बनने चाहिए।
क्या कंटेंट स्ट्रैटेजी में सोशल मीडिया भी होना चाहिए?
आपकी स्ट्रैटेजी में लिखा होना चाहिए कि आप कौन-से फ़ॉर्मैट बनाएँगे और वे कहाँ रहेंगे। आपकी अपनी वेबसाइट का कंटेंट नींव है। सोशल पोस्ट अक्सर उसी कंटेंट को दोबारा इस्तेमाल करती हैं या उसका प्रचार करती हैं, उसकी जगह नहीं लेतीं।
स्ट्रैटेजी तैयार होने के बाद कंटेंट कहाँ पब्लिश करें?
आपकी वेबसाइट हर ज़रूरी पीस का घर है। WEMASY का वेबसाइट बिल्डर आपको एक ही जगह से ब्लॉग पोस्ट और लैंडिंग पेज पब्लिश करने देता है, और हर आर्टिकल को लाइव करने से पहले ऑप्टिमाइज़ करने के लिए बिल्ट-इन SEO टूल भी हैं।