आप अपना स्ट्रैटेजी डॉक खोलते हैं। लक्ष्य समझ आते हैं। टॉपिक पिलर साफ़ हैं। फिर नीचे की ख़ाली जगह देखकर आप सोचते हैं "ठीक है, पर अगले मंगलवार को मैं ठीक-ठीक क्या लिखूँ?" प्लान के बिना स्ट्रैटेजी ऐसा नक़्शा है जिस पर कोई रास्ता नहीं बना।
कंटेंट प्लान वह व्यावहारिक डॉक्यूमेंट है जिसमें तय अवधि में बनने वाले ख़ास पीस की लिस्ट होती है। उसमें टॉपिक, फ़ॉर्मैट, डेडलाइन और ज़िम्मेदार लोगों के नाम होते हैं। जहाँ आपकी स्ट्रैटेजी कहती है "हम लॉन की देखभाल की जानकारी में अपनी पकड़ बनाएँगे", वहाँ आपका प्लान कहता है "15 मार्च तक बसंत में घास काटने की गाइड और 1 अप्रैल तक खाद की तुलना पब्लिश करें।"
कंटेंट प्लान में क्या होता है
कंटेंट प्लान में समय-सीमा, प्लान किए गए पीस की लिस्ट और हर आइटम पर काम शुरू करने लायक जानकारी होती है। टीम के साइज़ के हिसाब से ज़्यादातर प्लान एक तिमाही या एक महीने के होते हैं। हर एंट्री में वर्किंग टाइटल, फ़ॉर्मैट, टारगेट ऑडियंस, सफ़र की स्टेज, ज़िम्मेदार इंसान और आख़िरी तारीख़ होनी चाहिए।
प्लान में निर्भरताएँ भी लिखी जाती हैं। केस स्टडी लिखने से पहले शायद किसी ग्राहक का इंटरव्यू चाहिए। प्रोडक्ट लॉन्च पेज के लिए प्रोडक्ट टीम से फ़ाइनल कॉपी चाहिए। इन्हें पहले से नोट करने से आख़िरी वक़्त की भागदौड़ बचती है।
पहला स्टेप: स्ट्रैटेजी से टॉपिक निकालें
अपनी कंटेंट स्ट्रैटेजी खोलें और हर पिलर टॉपिक लिखें। हर पिलर के नीचे तीन से पाँच ख़ास आर्टिकल आइडिया सोचें। अपने साइट ऑडिट में कमियाँ देखें: वे टॉपिक जिन्हें प्रतिद्वंद्वी कवर करते हैं और आपने अभी तक नहीं किए।
उन आइडिया को प्राथमिकता दें जो आपके मौजूदा बिज़नेस लक्ष्य के काम आएँ। अगर इस तिमाही का फ़ोकस लीड जनरेशन है, तो सिर्फ़ जागरूकता वाले पीस की जगह विचार की स्टेज वाले कंटेंट को ज़्यादा वज़न दें। अगर आप नई सर्विस लॉन्च कर रहे हैं, तो लॉन्च की तारीख़ से पहले सपोर्टिंग पेज प्लान करें।
दूसरा स्टेप: कंटेंट टाइप और स्टेज में संतुलन रखें
अच्छे प्लान में फ़ॉर्मैट और फ़नल की स्टेज का मिश्रण होता है। उसमें अथॉरिटी बनाने वाली कॉर्नरस्टोन गाइड रखें, ख़ास सवालों के जवाब देने वाली छोटी पोस्ट रखें, और कन्वर्ज़न पर फ़ोकस वाले पेज, जैसे तुलना या सर्विस की जानकारी, भी रखें। अगर हर प्लान किया पीस लंबी गाइड है, तो आप उन पाठकों को खो देंगे जिन्हें जल्दी जवाब चाहिए।
पूरी लिस्ट देखें और गिनें कि कितने आइटम जागरूकता, विचार और फ़ैसले की स्टेज में आते हैं। तब तक बदलाव करें जब तक कोई एक स्टेज हावी न रहे, सिवाय तब जब आपकी स्ट्रैटेजी जानबूझकर ऐसा चाहे।
तीसरा स्टेप: तारीख़ें और ज़िम्मेदार तय करें
हर आइटम को असली डेडलाइन के साथ अपने कंटेंट कैलेंडर में डालें। रिसर्च, ड्राफ़्ट, रिव्यू और पब्लिश का समय जोड़ें। 1,500 शब्दों की गाइड में दो हफ़्ते लग सकते हैं। 600 शब्दों की जवाब वाली पोस्ट में तीन दिन।
हर पीस के लिए एक ज़िम्मेदार इंसान तय करें, भले ही कई लोग योगदान दें। वही प्रगति ट्रैक करता है और देरी की बात आगे उठाता है। साझा ज़िम्मेदारी का मतलब अक्सर यह होता है कि किसी की ज़िम्मेदारी नहीं।
चौथा स्टेप: जटिल पीस के लिए ब्रीफ़ लिखें
हर आइटम को पूरा ब्रीफ़ नहीं चाहिए। सीधी FAQ पोस्ट टाइटल और कीवर्ड से शुरू हो सकती है। कॉर्नरस्टोन गाइड, केस स्टडी और लैंडिंग पेज को लिखना शुरू करने से पहले विस्तृत कंटेंट ब्रीफ़ से फ़ायदा होता है। ब्रीफ़ में ऑडियंस, एंगल, ढाँचा, कीवर्ड और सफलता के पैमाने लिखे जाते हैं।
प्लानिंग के समय ब्रीफ़ लिखने से बाद में रिवीज़न का समय बचता है। जिस राइटर को साफ़ दिशा मिली हो, उसका पहला ड्राफ़्ट आपकी सोच के ज़्यादा क़रीब होता है, उस राइटर से जो आपका इरादा अंदाज़े से समझे।
पाँचवाँ स्टेप: हर महीने रिव्यू करें और बदलाव करें
प्लान पत्थर की लकीर नहीं होते। हर महीने के आख़िर में प्रगति देखें। अधूरे आइटम नई तारीख़ों के साथ आगे बढ़ाएँ। ग्राहकों के सवालों या मार्केट के बदलाव से आए तुरंत वाले टॉपिक जोड़ें। जो आइडिया अब आपके लक्ष्य से मेल नहीं खाते, उन्हें हटा दें।
ट्रैक करें कि आपने असल में क्या पब्लिश किया और क्या प्लान किया था। बार-बार कम पड़ना क्षमता की समस्या दिखाता है, मोटिवेशन की नहीं। महत्वाकांक्षा बदलने से पहले मात्रा बदलें।
जब आपको कंटेंट को ईमेल, विज्ञापन और लॉन्च के साथ मिलाना हो, तो आपका कंटेंट प्लान एक बड़े कंटेंट मार्केटिंग प्लान में जुड़ जाता है। न्यूज़लेटर की प्लानिंग के ख़ास सुझावों के लिए न्यूज़लेटर के लिए कंटेंट प्लानिंग पढ़ें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
कंटेंट प्लान कितने समय आगे तक का होना चाहिए?
छोटी टीमों के लिए एक तिमाही सबसे आम दायरा है। जब आप अभी शुरू कर रहे हों या आपका मार्केट तेज़ी से बदलता हो, तो महीने का प्लान ठीक रहता है। छह महीने तक तभी बढ़ाएँ जब आपका प्रोडक्शन वर्कफ़्लो स्थिर और भरोसेमंद हो।
महीने के प्लान में कितने कंटेंट पीस होने चाहिए?
मात्रा अपनी क्षमता के हिसाब से रखें, महत्वाकांक्षा के हिसाब से नहीं। अकेले काम करने वाले के लिए महीने में दो से चार अच्छे पीस वाजिब हैं। तीन से पाँच लोगों की टीम आठ से बारह प्लान कर सकती है। जब मक़सद नियमितता हो, तो ज़्यादा प्लान करने से कम प्लान करना बेहतर है।
कंटेंट प्लान और कंटेंट कैलेंडर में क्या फ़र्क़ है?
प्लान प्राथमिकता वाली लिस्ट है कि आप क्या बनाएँगे और क्यों। कैलेंडर उसमें पब्लिश की ख़ास तारीख़ें और स्टेटस ट्रैकिंग जोड़ता है। कई टीमें पहले प्लान बनाती हैं, फिर आइटम को डेडलाइन के साथ कैलेंडर में डाल देती हैं।
क्या कंटेंट को कीवर्ड के हिसाब से प्लान करना चाहिए?
कीवर्ड रिसर्च से टॉपिक चुनने में मदद मिलनी चाहिए, वह टॉपिक की जगह नहीं ले सकती। पहले वे टॉपिक चुनें जिनकी आपकी ऑडियंस को ज़रूरत है, फिर देखें कि वे कौन-से सर्च शब्द इस्तेमाल करते हैं। बेमतलब टॉपिक पर कीवर्ड ठूँसने से ऐसा कंटेंट बनता है जो रैंक भी कम करता है और पढ़ने में भी अटपटा लगता है।
बिना प्लान किए आए कंटेंट के अनुरोध कैसे संभालें?
हर महीने दो स्लॉट ख़ाली रखें। जब कोई अनुरोध आए, तो उसे अपने स्ट्रैटेजी पिलर से मिलाकर देखें। अगर वह फ़िट बैठता है, तो पहले से भरे शेड्यूल के ऊपर जोड़ने की जगह उसे कम प्राथमिकता वाले किसी प्लान किए आइटम से बदल दें।
अपने प्लान का कंटेंट कहाँ पब्लिश करें?
आपकी वेबसाइट प्लान किए कंटेंट की मुख्य जगह है। WEMASY का वेबसाइट बिल्डर आपको ब्लॉग पोस्ट और पेज के लिए विज़ुअल एडिटर देता है, इसलिए प्लान से पब्लिश तक का काम एक ही सिस्टम में होता है।