कंटेंट प्लानिंग क्या है

कंटेंट प्लानिंग लगातार चलने वाली प्रक्रिया है जिसमें तय होता है कि आपका ब्रांड क्या और कब पब्लिश करेगा। इस चैप्टर में बताया गया है कि प्लानिंग आपकी स्ट्रैटेजी को कैलेंडर, ब्रीफ़ और वर्कफ़्लो से कैसे जोड़ती है, जिससे कंटेंट आगे बढ़ता रहता है।

ड्राफ़्ट

आपकी टीम ने एक दोपहर में बारह दमदार टॉपिक आइडिया सोचे। तीन महीने बाद चार लाइव हैं, दो आधे लिखे हैं, और बाक़ी एक साझा डॉक में पड़े हैं जिसे मीटिंग के बाद किसी ने नहीं खोला। आठ आइडिया। ज़्यादातर पर कोई अमल नहीं। आइडिया सोचने और पब्लिश करने के बीच का यही फ़ासला कंटेंट प्लानिंग भरती है।

कंटेंट प्लानिंग वह प्रक्रिया है जिसमें तय होता है कि आप क्या बनाएँगे, वह कब पब्लिश होगा, कौन उसे बनाएगा और वह आपके बिज़नेस लक्ष्य से कैसे जुड़ता है। यह आपकी ऊँचे स्तर की स्ट्रैटेजी और लिखने-पब्लिश करने के रोज़ के काम के बीच में आती है।

कंटेंट प्लानिंग क्या है?

कंटेंट प्लानिंग एक व्यवस्थित प्रक्रिया है: टॉपिक चुनना, प्रोडक्शन शेड्यूल करना, ज़िम्मेदारियाँ बाँटना और लिखना शुरू करने से पहले ज़रूरी चीज़ें तैयार करना। यह कोई एक डॉक्यूमेंट नहीं है। यह फ़ैसलों, टूल और आदतों का मेल है जो आइडिया को पब्लिशिंग की नियमित रफ़्तार में बदलता है।

प्लानिंग कई स्तरों पर होती है। तिमाही प्लानिंग थीम और प्राथमिकताएँ तय करती है। मासिक प्लानिंग ख़ास पीस चुनती है। साप्ताहिक प्लानिंग डेडलाइन पक्की करती है और रुकावटें दूर करती है। हर स्तर अगले स्तर को आधार देता है।

कंटेंट प्लानिंग क्यों ज़रूरी है

प्लानिंग के बिना कंटेंट बनाना अपने आप रिएक्टिव हो जाता है। आप तब पब्लिश करते हैं जब किसी के पास एक घंटा ख़ाली हो, या जब किसी प्रतिद्वंद्वी की पोस्ट देखकर घबराहट हो। रिएक्टिव कंटेंट की क्वालिटी, समय और रणनीतिक वैल्यू, तीनों बेतरतीब होते हैं। प्लानिंग आपको रिसर्च, इंटरव्यू, डिज़ाइन और रिव्यू के लिए समय देती है।

प्लानिंग दोहराव भी रोकती है। जब सारे टॉपिक एक साझा व्यू में हों, तो एक ही आर्टिकल दो बार किसी को नहीं सौंपा जाता। सेल्स, सपोर्ट और मार्केटिंग आपस में टकराने वाले असाइनमेंट बनाए बिना आइडिया सुझा सकते हैं।

आपकी प्लानिंग में दिशा के लिए आपकी कंटेंट स्ट्रैटेजी और शेड्यूल के लिए आपका कंटेंट कैलेंडर देखा जाना चाहिए। स्ट्रैटेजी जवाब देती है "हमें किस पर फ़ोकस करना चाहिए?" प्लानिंग जवाब देती है "इस महीने हम क्या बना रहे हैं?"

कंटेंट प्लानिंग के मुख्य हिस्से

असरदार प्लानिंग में चार काम होते हैं। टॉपिक का चुनाव: ऐसे आइडिया चुनना जो ऑडियंस की ज़रूरत और बिज़नेस लक्ष्य के काम आएँ। संसाधनों का बँटवारा: तय करना कि हर पीस कौन लिखेगा, डिज़ाइन करेगा और रिव्यू करेगा। टाइमलाइन संभालना: नज़र आने वाले कैलेंडर पर वाजिब डेडलाइन रखना। तैयारी: प्रोडक्शन शुरू होने से पहले ब्रीफ़ लिखना और सोर्स मटीरियल जुटाना।

हर काम का एक टूल है। आपका कंटेंट प्लान टॉपिक की लिस्ट रखता है। आपका कैलेंडर तारीख़ें रखता है। आपके ब्रीफ़ क्रिएटिव दिशा रखते हैं। आपका वर्कफ़्लो ड्राफ़्ट से पब्लिश तक के स्टेप तय करता है।

कंटेंट प्लानिंग की ज़िम्मेदारी किसकी होती है?

छोटे बिज़नेस में अक्सर फ़ाउंडर या मार्केटिंग लीड प्लानिंग संभालता है। बड़ी टीमों में कंटेंट मैनेजर या एडिटर शेड्यूल को कोऑर्डिनेट करता है और राइटर और डिज़ाइनर काम पूरा करते हैं। ज़िम्मेदार इंसान को हर पीस लिखना ज़रूरी नहीं, पर प्लान को अपडेट रखना और टकराव सुलझाना उसका काम है।

प्लानिंग सबसे अच्छी तब चलती है जब वह नियमित मीटिंग हो, एक बार का इवेंट नहीं। हर हफ़्ते तीस मिनट की जाँच कैलेंडर को ताज़ा रखती है और डेडलाइन निकलने से पहले समस्याएँ सामने ले आती है।

प्लानिंग की आम ग़लतियाँ

ज़रूरत से ज़्यादा प्लानिंग भी उतनी ही नुक़सानदेह है जितनी कम प्लानिंग। बारह महीने का प्लान, जिसमें ख़ास टाइटल भरे हों, फ़रवरी तक टूट जाएगा, क्योंकि मार्केट बदलते हैं और क्षमता बदलती है। तिमाही के लिए थीम और मात्रा प्लान करें। ख़ास टाइटल महीने के लिए प्लान करें।

एक और ग़लती है कंटेंट प्लान करना पर डिस्ट्रीब्यूशन प्लान न करना। जो तैयार आर्टिकल कोई प्रमोट नहीं करता, वह क्वालिटी चाहे जैसी हो, उम्मीद से कम चलता है। अपनी प्लानिंग में प्रमोशन के स्टेप भी रखें, भले ही वे एक ईमेल में ज़िक्र और दो सोशल पोस्ट जितने सीधे हों।

एवरग्रीन और समय के हिसाब से ताज़ा टॉपिक में से चुनना प्लानिंग का मुख्य फ़ैसला है। हमारी गाइड एवरग्रीन बनाम टाइमली कंटेंट आपको वे पीस जो सालों तक रैंक करते हैं और वे पोस्ट जो अभी की दिलचस्पी पकड़ती हैं, इनमें संतुलन रखने में मदद करती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

कंटेंट प्लानिंग कंटेंट स्ट्रैटेजी से कैसे अलग है?

स्ट्रैटेजी आपकी लंबे समय की दिशा तय करती है: ऑडियंस, पिलर, लक्ष्य और लहजा। प्लानिंग वह दोहराई जाने वाली प्रक्रिया है जिसमें तय होता है कि नज़दीकी समय में क्या बनाना है। स्ट्रैटेजी आप तिमाही या साल में एक बार तय करते हैं। प्लानिंग हर हफ़्ते करते हैं।

हर हफ़्ते कंटेंट प्लानिंग में कितना समय लगना चाहिए?

ज़्यादातर छोटी टीमों के लिए तीस से साठ मिनट काफ़ी हैं। इस समय में कैलेंडर अपडेट करें, ड्राफ़्ट की प्रगति देखें और अगले हफ़्ते की डेडलाइन पक्की करें। लंबे सेशन मासिक या तिमाही प्लानिंग रिव्यू के लिए रखें।

कंटेंट प्लानिंग के लिए कौन-से टूल चाहिए?

कम से कम टॉपिक और तारीख़ों के लिए एक साझा डॉक्यूमेंट या बोर्ड चाहिए। कई टीमें स्प्रेडशीट या प्रोजेक्ट बोर्ड इस्तेमाल करती हैं। टूल से ज़्यादा ज़रूरी है उसे हर हफ़्ते अपडेट करने की आदत।

क्या कंटेंट प्लानिंग में पुराने कंटेंट को अपडेट करना भी आना चाहिए?

रखरखाव आपके प्लान में नए कंटेंट के साथ आना चाहिए। सबसे अच्छा चलने वाले पेज का तिमाही रिव्यू शेड्यूल करें। पुराने आँकड़े, लिंक और उदाहरण अपडेट करने से अक्सर बिल्कुल नया कुछ पब्लिश करने से जल्दी नतीजे मिलते हैं।

सीमित बजट में कंटेंट कैसे प्लान करें?

प्लानिंग को ऐसे ज़्यादा असर वाले फ़ॉर्मैट पर रखें जिन्हें आपकी टीम निभा सके। हर महीने एक मज़बूत आर्टिकल और पेज के नियमित अपडेट, अक्सर वीडियो, पॉडकास्ट और ब्लॉग की उस बिखरी कोशिश से बेहतर चलते हैं जिसे आप संभाल नहीं सकते।

कंटेंट प्लानिंग आपकी वेबसाइट से कैसे जुड़ती है?

हर प्लान किए पीस को तैयार होने के बाद रहने की जगह चाहिए। WEMASY का वेबसाइट बिल्डर आपको ब्लॉग पोस्ट और पेज व्यवस्थित करने देता है, ताकि आपका पब्लिशिंग शेड्यूल सीधे आपकी साइट के लाइव कंटेंट से मेल खाए।

यह भी पढ़ें

और पढ़ें: लिखने के बारे में सब कुछ

इसे अभी आज़माएँ
अपनी खुद की वेबसाइट पर।

WEMASY के साथ मुफ़्त शुरू करें और कुछ ही मिनटों में अपनी साइट बनाएँ।