पब्लिश का बटन चमक रहा है। आप उसे क्लिक करते हैं। एक सोशल कैप्शन लिखते हैं, लिंक चिपकाते हैं और अगले काम पर चले जाते हैं। दो हफ़्ते बाद पोस्ट पर चालीस व्यू हैं और आप खुद से कहते हैं कि आपके बिज़नेस के लिए ब्लॉगिंग काम नहीं करती। लिखना ठीक था। प्रमोशन लगभग हुआ ही नहीं। यह चैप्टर उसी कमी को भरता है।
पब्लिश के बाद ब्लॉग पोस्ट का प्रमोशन करने का मतलब है एक तय क्रम में ऐसे काम करना, जो आपके आर्टिकल को आपकी ऑडियंस के इस्तेमाल किए चैनल पर नज़र में बनाए रखें। ब्लॉग प्रमोशन स्ट्रेटेजी लॉन्च के एक पल को कई हफ़्तों की मुहिम में बदल देती है, जिससे हर पोस्ट को पाठक ढूंढने का पूरा मौका मिलता है। व्यवहार में यह कैसा दिखता है, यहां देखें।
पब्लिश करने के बाद आपके पहले 24 घंटे
लाइव होने के कुछ घंटों के अंदर पोस्ट को अपने मुख्य सोशल चैनल पर शेयर करें। शुरुआती लाइन ऐसी हो जो पाठक का फ़ायदा बताए, विषय का नाम नहीं। "नई ब्लॉग पोस्ट: हेडलाइन के बारे में" से बेहतर चलता है "अंदाज़ा लगाना बंद करें कि कौन-सी हेडलाइन चलती है।"
अगर पोस्ट इतनी दमदार है कि इनबॉक्स में जगह पाए, तो अपनी ईमेल लिस्ट को नोटिफ़िकेशन भेजें। ईमेल छोटा रखें: दो वाक्य कि यह क्यों ज़रूरी है, एक लिंक और अभी क्लिक करने की एक वजह।
अपनी साइट के काम के पेज अपडेट करें। अगर नई पोस्ट किसी ऐसे विषय को आगे बढ़ाती है जो आपने पहले कवर किया था, तो पुराने आर्टिकल से इंटरनल लिंक जोड़ें। अगर वह किसी रिसोर्स कलेक्शन में आती है, तो उसे तुरंत वहां जोड़ें।
पहले हफ़्ते का प्रमोशन प्लान
दूसरा या तीसरा दिन: पोस्ट को दूसरे सोशल चैनल पर अलग नज़रिए से शेयर करें। आर्टिकल से कोई चौंकाने वाला आंकड़ा या काम की टिप निकालें और लॉन्च वाले कैप्शन को दोहराने की जगह उससे शुरुआत करें।
चौथा या पांचवां दिन: उन कम्युनिटी में हिस्सा लें जहां आपकी ऑडियंस जुटती है। किसी फ़ोरम या ग्रुप में उससे जुड़े सवाल का जवाब दें और अपनी पोस्ट का ज़िक्र तभी करें जब वह सच में बातचीत में मदद करे। बिना संदर्भ के लिंक डालना स्पैम जैसा लगता है और भरोसा तोड़ता है।
छठा या सातवां दिन: एक छोटी फ़ॉलो-अप पोस्ट बनाएं जो आर्टिकल के किसी एक सेक्शन की झलक दे। "हमने पिछले हफ़्ते प्राइसिंग पर एक गाइड पब्लिश की थी। पैकेज टियर वाले सेक्शन पर सबसे ज़्यादा सवाल आए। यह रहा उसका छोटा वर्शन।" यह दूसरा संपर्क उन लोगों तक पहुंचता है जिन्होंने पहली घोषणा नहीं देखी।
पहले हफ़्ते के बाद लगातार प्रमोशन
एवरग्रीन पोस्ट बार-बार प्रमोशन की हकदार हैं। सबसे अच्छा चलने वाली पोस्ट हर महीने नए कैप्शन के साथ दोबारा शेयर करें। उन्हें ईमेल नर्चर सीक्वेंस में जोड़ें। मिलते-जुलते विषयों के नए आर्टिकल में उनका हवाला दें।
पोस्ट को दूसरे फ़ॉर्मैट में रीपर्पज़ करें। एक दमदार ब्लॉग आर्टिकल तीन सोशल पोस्ट, न्यूज़लेटर का एक सेक्शन और एक स्लाइड कैरोसेल बन सकता है। हर फ़ॉर्मैट प्रमोशन का एक नया मौका है जो ओरिजिनल की ओर वापस ले आता है। ठोस आइडिया के लिए देखें एक ब्लॉग पोस्ट को कई फ़ॉर्मैट में कैसे रीपर्पज़ करें।
ट्रैक करें कि कौन-से प्रमोशन तरीके सबसे ज़्यादा ट्रैफ़िक लाते हैं। इस डेटा से उसी पर ज़ोर बढ़ाएं जो काम करता है और जो नहीं करता उसे छोड़ दें। समय के साथ आपकी ब्लॉग प्रमोशन स्ट्रेटेजी और धारदार हो जाती है, क्योंकि वह आदत पर नहीं, सबूत पर टिकी होती है।
एक अनुशासन के रूप में प्रमोशन की बड़ी तस्वीर के लिए पढ़ें कंटेंट प्रमोशन क्या है। इन स्टेप को दोहराए जा सकने वाले डॉक्यूमेंट में बदलने के लिए देखें कंटेंट प्रमोशन चेकलिस्ट कैसे बनाएं।
हमारा ब्लॉग सोशल मीडिया कैलेंडर चेकलिस्ट उन फ़ॉलो-अप पोस्ट को शेड्यूल करने में मदद करता है जो ब्लॉग प्रमोशन को नियमित बनाए रखती हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
एक ही ब्लॉग पोस्ट को सोशल मीडिया पर कितनी बार शेयर करना चाहिए?
पहले दो हफ़्तों में तीन से पांच बार शेयर करना ठीक रहता है, हर बार अलग शुरुआती लाइन या नज़रिए के साथ। इन्हें कम से कम दो दिन के अंतर पर रखें, ताकि फ़ॉलोअर को फ़ीड में बार-बार वही लिंक न दिखे।
क्या हर ब्लॉग पोस्ट का प्रमोशन एक जितनी मेहनत से करना चाहिए?
अपने सबसे मज़बूत और एवरग्रीन कंटेंट के पीछे ज़्यादा प्रमोशन लगाएं। किसी खबर पर झटपट प्रतिक्रिया वाली पोस्ट को छोटा-सा धक्का काफ़ी है। जिस पूरी गाइड को लिखने में दिन लगे, उसे आपके सभी चैनल पर पूरे हफ़्ते का प्रमोशन मिलना चाहिए।
क्या मेरे ब्लॉग पेज का डिज़ाइन प्रमोशन के नतीजों पर असर डालता है?
साफ़ लेआउट, पढ़ने लायक फ़ॉन्ट और दिखती हुई हेडलाइन विज़िटर को आपके प्रमोशनल लिंक पर क्लिक करने के बाद भी पेज पर रोके रखती है। WEMASY के वेबसाइट बिल्डर में पढ़ने के लिए बने ब्लॉग टेम्पलेट हैं, जो बाउंस रेट घटाते हैं। यही बाउंस रेट प्रमोशन की मेहनत पर पानी फेरता है।
पब्लिश करने के कितने समय बाद प्रमोशन शुरू करना चाहिए?
पब्लिश करने के कुछ घंटों के अंदर शुरू करें, जब कंटेंट आपके दिमाग में ताज़ा हो। एक हफ़्ता रुकने पर रफ़्तार चली जाती है और जब आप शेयर करते हैं तो पोस्ट पुरानी लगती है। लिखना खत्म करने के तुरंत बाद प्रमोशन का जोश सबसे ज़्यादा होता है।
ब्लॉग प्रमोशन की सफलता कैसे नापूं?
हर प्रमोट की गई पोस्ट के लिए रेफ़रल सोर्स के हिसाब से पेज व्यू, ईमेल क्लिक-थ्रू रेट और सोशल एंगेजमेंट देखें। एनालिटिक्स दिखाता है कि किस प्रमोशन चैनल ने सबसे ज़्यादा पाठक भेजे और क्या उन्होंने पूरा आर्टिकल पढ़ा।
क्या मैं पुरानी ब्लॉग पोस्ट का प्रमोशन कर सकता हूं जिन्हें कभी रफ़्तार नहीं मिली?
जिन पुरानी पोस्ट का कंटेंट मज़बूत है पर शुरू में प्रमोशन कमज़ोर रहा, वे दूसरे धक्के के लिए सबसे अच्छी उम्मीदवार हैं। पुरानी पड़ चुकी जानकारी अपडेट करें, ज़रूरत हो तो हेडलाइन नई करें और पोस्ट को ऐसे अपने प्रमोशन प्लान से गुज़ारें जैसे वह नई हो।